जीवन विद्या प्राथमिक परिचय शिविर - रूप-रेखा

* प्रत्येक जीवन विद्या शिविर में वस्तु एवं क्रम प्रबोधक एवं श्रोताओं के अनुसार थोड़ा बदलता है | 'जीवन विद्या प्राथमिक परिचय शिविर' 'मध्यस्थ दर्शन अध्ययन बिंदुओं' का एक व्यावहारिक परिचय है |  यह अध्ययन बिंदु श्री ए.नागराजजी द्वारा दिया 'प्रारंभिक पाठ्यक्रम है ' | यह अध्ययन बिंदु जीवन विद्या शिविर का आधार है, जो सह-अस्तित्ववाद में मूल अवधारणओं से अवगत कराता है | अत : परिचय शिविर के दो स्तर हैं - १) प्राथमिक परिचय २) अध्ययन बिंदु (वस्तु) परिचय |  उसके बाद 'अध्ययन' है | 


प्रथम दिवस - परिचय 

  • वर्तमान स्थिति का अवलोकन - स्वयं, परिवार, समाज एवं प्रकृति में 
  • मानव के मूल प्रश्न - क्यों जीना ? कैसे जीना ?
  • मानव की आधारभूत आवश्यकता = बौद्धिक, व्यावहारिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक आयामों में समाधान = सुख = ज्ञान
  • समाधान = वास्तविकता को समझकर तदनुसार जीना  =
    • अस्तित्व सम्पूर्ण का ज्ञान, स्वयं का ज्ञान, मानवीय आचरण का ज्ञान = मेरा अस्तित्व में प्रयोजन/भागीदारी 
    • = व्यक्ति ,परिवार, समाज एवं प्रकृति में व्यवस्था को समझकर उसमें जीना 

द्वितीय दिवस - स्वयं में व्यवस्था, सहअस्तित्व - चैतन्य (स्वयं) को समझना, अस्तित्व की समझ 

  • मानव चैतन्य और शरीर के रूप में 
  • चैतन्य एवं अन्य क्रियाओं में भेद - मान्यताओं की भूमिका 
  • 'चैतन्य' जीवन या स्वयं में क्रियाएं: 
    • आशा, विचार, इच्छा, बोध - मन, वृत्ति, चित्त, बुद्धि ...
    • स्वयं में प्रयोजन विहीनता, समस्याओं के कारण एवं निवारण 
  • वास्तविकता के रूपात्मक एवं अरूपात्मक आयामों को समझने की आवश्यकता - रूप, गुण, स्वभाव एवं धर्म 

दिवस ३ - परिवार में व्यवस्था, सहअस्तित्व - मानव संबंधों को समझना

  • मानव संबंधों का मूल आधार एवं स्वरूप। 
  •  विभिन्न सम्बन्ध - माता, पिता, पुत्र, पत्नी, गुरु, मित्र, इत्यादि। 
  • संबंधों में मूल्य एवं अपेक्षा - विश्वास, सम्मान, प्रेम, स्नेह, ममता….
  • परिवार का स्वरूप, समस्याएं, समाधान। 

 दिवस ४ - समाज में व्यवस्था, सहअस्तित्व - निहित संबंधों एवं ढांचों को समझना

  • वर्तमान मानव समाज के समस्या एवं उनका समीक्षा
  • मानवीय समाज का सार्वभौम लक्ष्य 
  • 'मानवीय व्यवस्था' के लिए निम्न विधाओं में अवलोकन एवं प्रस्ताव
    • शिक्षा-संस्कार, स्वास्थ्य, उत्पादन-कार्य, विनिमय कोष, न्याय-सुरक्षा 
  • मानवीय व्यवस्था के लिए परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था का प्रस्तावना 

दिवस ५ - प्रकृति में व्यवस्था, सहअस्तित्व - वास्तविकता, प्रकृति एवं उसके आयामों को समझना 

  • रूप, गुण,  स्वभाव, धर्म - पदार्थ, पेढ-पौधे, जीवों एवं मानव में 
  •  प्रकृति में निहित अंतर-सम्बन्ध एवं आवर्तनशीलता 
  • प्राकृतिक असंतुलन के कारण एवं समाधान 

दिवस ६ - अस्तित्व में व्यवस्था, सहअस्तित्व - वास्तविकता, ब्रह्माण्ड एवं प्रकटन को समझना 

  • वास्तविकता 'सहअस्तित्व' रूप में है = जड़ (भौतिक-रासायनिक) एवं चैतन्य इकाइयां शून्य में डूबे, समाहित हैं |  
  • शून्य - व्यापक, साम्य ऊर्जा है 
  • अस्तित्व में प्रकटन एवं विकास 
  • अस्तित्व में मानव का स्थान एवं प्रयोजन 
  • ज्ञान, विवेक, विज्ञान पर स्पश्टता 
    • ज्ञान = अस्तित्व,  चैतन्य जीवन एवं मानवीय आचरण का 
    • विवेक - सत्य-असत्य  पहचान, मानव लक्ष्य पहचान 
    • विज्ञान = प्रक्रियात्मक समझ = भौतिक विज्ञान, व्यावहारिक विज्ञान, अध्यात्म विज्ञान 

दिवस ७ - प्रश्नोत्तर एवं सारांश 

  • इस दर्शन की भूमिका, शिविर क्रम हेतु अगले कदम 
  • सूर्य के इस ओर और उस और सभी मुद्दों पर खुला चर्चा !
  • प्रतिभागी मूल्याङ्कन एवं प्रतिसाद 

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